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शनिवार, 14 दिसंबर 2024

मन ले के आया माता रानी के भवन में

मन ले के आया माता रानी के भवन में

"मन ले के आया माता रानी के भवन में" एक प्रसिद्ध भक्ति गीत है जो माँ दुर्गा, माता रानी और उनकी विभिन्न रूपों की महिमा का वर्णन करता है। यह गीत विशेष रूप से भक्तों के दिलों में श्रद्धा और भक्ति का भाव उत्पन्न करता है। गीत के माध्यम से यह बताया गया है कि माता रानी के मंदिर और उनके भवन में जाकर व्यक्ति को मानसिक और आत्मिक सुख मिलता है।

1.    प्रारंभिक पंक्तियाँ: गीत की शुरुआत में भक्त अपने मन को लेकर माता रानी के भवन में प्रवेश करने की बात करता है। वह कहता है कि वहाँ उसे बड़ा सुख मिला और इस सुख के कारण उसे जीवन में शांति और समृद्धि की प्राप्ति हुई। "बड़ा सुख पाया" का अर्थ है कि माता रानी के आशीर्वाद से उसे आध्यात्मिक सुख और संतोष मिला।

2.    माँ की महिमा: गीत में माँ दुर्गा के विभिन्न रूपों का उल्लेख किया गया है। एक स्थान पर माँ के भैरव पर क्रोध करके त्रिशूल उठाने और शक्तिशाली रूप को दिखाने की घटना का वर्णन है। इसके अलावा, यह भी बताया गया है कि माँ ने कई स्थानों पर अपने भक्तों की रक्षा की और उनकी पूजा की महिमा का विस्तार किया।

3.    माँ के भव्य भवन की कथा: एक अन्य भाग में यह बताया गया है कि माता रानी के भवन की सुंदरता और उसकी महिमा कितनी अपार है। इसमें शाह अकबर का जिक्र है, जो नंगे पाँव माता के दरबार में आया और श्रद्धा से शीश झुका। इससे यह संकेत मिलता है कि माँ की महिमा न केवल सामान्य लोगों के लिए, बल्कि बड़े-बड़े शासकों के लिए भी प्रेरणास्त्रोत रही है।

4.    चिंतपूर्णी माता की महिमा: गीत में विशेष रूप से चिंतपूर्णी माता की महिमा का उल्लेख किया गया है। कहा गया है कि जो भक्त माँ के चिंतन में मग्न रहते हैं, उन्हें कोई चिंता नहीं रहती। माँ उनकी सभी समस्याओं का समाधान करती हैं और उनके जीवन में सुख-शांति का संचार करती हैं।

5.    नैना देवी का काव्य रूप: गीत के अंत में नैना देवी की भी महिमा गाई गई है। यहाँ कहा गया है कि माता नैना देवी ने अपने भक्त नैना गुज्जर को दर्शन दिए और उनके जीवन को धन्य किया। नैना गुज्जर ने माँ के आदेश पर उनका मंदिर बनवाया, और उनका जीवन पूरी तरह से माँ की भक्ति में रमा रहा।

6.    कुल मिलाकर संदेश: यह भक्ति गीत भक्तों को यह संदेश देता है कि माता रानी के चरणों में शरण लेने से हर प्रकार की चिंता और दुख दूर हो जाते हैं। उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।

इस गीत में विभिन्न धार्मिक और भक्ति से जुड़ी घटनाओं का वर्णन किया गया है, जो दर्शाती हैं कि माँ दुर्गा और उनके विभिन्न रूपों की पूजा से न केवल भक्ति की भावना बढ़ती है, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और सुख भी प्राप्त होता है।

 

मन ले के आया माता रानी के भवन में

(मन ले के आया माता रानी के भवन में)

बड़ा सुख पाया...

बड़ा सुख पाया माती रानी के भवन में

(मन ले के आया माता रानी के भवन में) भवन में

(मन ले के आया माता रानी के भवन में)

जय जय माँ, अंबे माँ

जय जय माँ, जगदंबे माँ

(जय जय माँ, अंबे माँ)

(जय जय माँ, जगदंबे माँ)

मैं जानूँ वैष्णव माता, तेरे ऊँचे भवन की माया

भैरव पर क्रोध में आके माँ तूने त्रिशूल उठाया

वो पर्बत जहाँ पे तूने शक्ति का रूप दिखाया

भक्तों ने वहीं पे मैया तेरे नाम का भवन बनाया

बड़ा सुख पाया...

बड़ा सुख पाया माती रानी के भवन में

(मन ले के आया माता रानी के भवन में) भवन में

(मन ले के आया माता रानी के भवन में)

जय जय माँ, अंबे माँ

जय जय माँ, जगदंबे माँ

(जय जय माँ, अंबे माँ)

(जय जय माँ, जगदंबे माँ)

तेरे तेज ने ज्वाला मैया जब उजयारा फैलाया

शाह अकबर नंगे पैरों तेरे दरबार में आया

तेरी जग-मग ज्योत के आगे श्रद्धा से शीश झुकाया

तेरे भवन की शोभा देखी, सोने का क्षत्र चढ़ाया

बड़ा सुख पाया...

बड़ा सुख पाया माती रानी के भवन में

(मन ले के आया माता रानी के भवन में) भवन में

(मन ले के आया माता रानी के भवन में)

जय जय माँ, अंबे माँ

जय जय माँ, जगदंबे माँ

(जय जय माँ, अंबे माँ)

(जय जय माँ, जगदंबे माँ)

हे, चिंतपूर्णी माता, तेरी महिमा सबसे न्यारी

दिए भाईदास को दर्शन, तू भक्तों की है प्यारी

जो करे माँ तेरा चिंतन, तू चिंता हर दे सारी

तेरे भवन से झोली भरके जाते हैं सभी पुजारी

बड़ा सुख पाया...

बड़ा सुख पाया माती रानी के भवन में

(मन ले के आया माता रानी के भवन में)

(मन ले के आया माता रानी के भवन में)

जय जय माँ, अंबे माँ

जय जय माँ, जगदंबे माँ

(जय जय माँ, अंबे माँ)

(जय जय माँ, जगदंबे माँ)

माँ नैना देवी तूने ये नाम भगत से पाया

नैना गुज्जर को तूने सपने में दरस दिखाया

आदेश पे तेरे उसने तेरा मंदिर बनवाया

जीवन भर बैठ भवन में माँ तेरा ही गुण गया

बड़ा सुख पाया...

बड़ा सुख पाया माती रानी के भवन में

(मन ले के आया माता रानी के भवन में) भवन में

(मन ले के आया माता रानी के भवन में)

जय जय माँ, अंबे माँ

जय जय माँ, जगदंबे माँ

जगदंबे माँ

गुरुवार, 5 दिसंबर 2024

चलो शिव शंकर के मंदिर में भक्तों

 चलो शिव शंकर के मंदिर में भक्तों

"चलो शिव शंकर के मंदिर में भक्तों" एक भक्ति गीत है, जो भगवान शिव की महिमा और उनकी पूजा के महत्व को प्रस्तुत करता है। इस गीत में शिवजी के मंदिर में जाकर उनकी पूजा करने की प्रेरणा दी गई है, ताकि भक्त अपने जीवन को शुद्ध और पवित्र बना सकें। गीत का केंद्रीय संदेश है कि भगवान शिव के चरणों में श्रद्धा और भक्ति से जीवन में शांति, शक्ति और मुक्ति प्राप्त होती है।

गीत की शुरुआत होती है भक्तों को शिव शंकर के मंदिर जाने और उनके चरणों में सिर झुका कर उनका भजन करने के लिए प्रेरित करने से। गीत में यह बताया गया है कि अगर कोई भक्त शिवजी के नाम का जाप करता है और उनके भजन गाता है, तो वह अपने तन-मन को गंगा की तरह पवित्र कर सकता है। शिवजी की पूजा करने से जीवन में मुक्ति का मार्ग खुलता है, क्योंकि यह संसार केवल झूठी माया का बंधन है, और शिव की शरण में आने से ही आत्मा को शुद्धि और शांति मिलती है।

गीत में भगवान शिव के नाम का जाप करने की शक्ति और महत्व को बताया गया है, जिससे न केवल आत्मा को शांति मिलती है, बल्कि व्यक्ति को शक्ति, दया और कृपा भी प्राप्त होती है। "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का उच्चारण करने से व्यक्ति के जीवन में हर प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और वह अपने जीवन को सच्चे मार्ग पर चला सकता है।

गीत में यह भी कहा गया है कि भगवान शिव का दयालु रूप और उनकी कृपा की छांव हमें हर कठिनाई से उबार सकती है। शिव की पूजा करने से मनुष्य अपने जीवन को सफल और सार्थक बना सकता है। जो व्यक्ति सच्चे दिल से भगवान शिव की पूजा करता है, वह न केवल आत्मिक उन्नति पाता है, बल्कि उसका जीवन भी मंगलमय और समृद्ध होता है।

1.    शिव की भक्ति से जीवन की पवित्रता: गीत में यह संदेश दिया गया है कि भगवान शिव की पूजा से हमारे तन और मन की शुद्धि होती है, जैसे गंगा नदी का पानी शुद्ध करता है।

2.    मुक्ति का मार्ग: संसार में जो माया का बंधन है, शिव शंकर के मंदिर में जाकर और उनका ध्यान करके इस बंधन से मुक्ति पाई जा सकती है।

3.    शक्ति और कृपा का आशीर्वाद: शिव जी का नाम लेने से व्यक्ति को शक्ति और दया प्राप्त होती है, और उनकी कृपा से जीवन में सभी समस्याएं समाप्त हो सकती हैं।

4.    आध्यात्मिक उन्नति: शिव शंकर की पूजा और उनके भजन से आत्मा को शुद्ध किया जा सकता है, और यही मार्ग व्यक्ति को मोक्ष की ओर ले जाता है।

5.    सच्ची भक्ति का महत्व: जो व्यक्ति अपने तन-मन से शिव का पूजारी बनता है और उनकी भक्ति करता है, वह जीवन में सफलता और संतोष पाता है।

यह गीत भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति को प्रकट करता है, और उनके आशीर्वाद से जीवन को सफल और संतुलित बनाने की प्रेरणा देता है। "चलो शिव शंकर के मंदिर में भक्तों" गीत भक्तों को शिव की पूजा करने, उनके नाम का जाप करने और जीवन में शिव के आशीर्वाद से शांति और उन्नति प्राप्त करने की प्रेरणा देता है। 

 

चलो शिव शंकर के मंदिर में भक्तों

चलो शिव शंकर के मंदिर में भक्तों

शिवजी के चरणों में सर को झुकाए

करें अपने तन-मन को गंगा सा पावन

करें अपने तन-मन को गंगा सा पावन

जपे नाम शिव का, भजन इनके गाएँ

चलो शिव शंकर के मंदिर में भक्तों

ये संसार है झूठी माया का बंधन

शिवालय में मारग है मुक्ति का भक्तों

(ॐ नमः शिवाय नमो)

महादेव का नाम लेने से हर दिन

मिलेगा हमें दान शक्ति का भक्तों

मिट्टी में मिट्टी की काया मिलेगी

मिट्टी में मिट्टी की काया मिलेगी

चलो आत्मा को तो कुंदन बनाए

चलो शिव शंकर के मंदिर में भक्तों

कहीं भी नहीं अंत उसकी दया का

करें वंदना उस दयालु पिता की

(ॐ नमः शिवाय नमो)

हमें भी मिले छाँव उसकी कृपा की

हमें भी मिले भीख उसकी दया की

लगाकर समाधि करें शिव का सुमिरन

लगाकर समाधि करें शिव का सुमिरन

यूँ सोए हुए भाग अपने जगाएँ

चलो शिव शंकर के मंदिर में भक्तों

करें सबका कल्याण कल्याणकारी

भरे सबके भंडार त्रिनेत्रधारी

(ॐ नमः शिवाय नमो)

कोई उसको जग में कमी ना रहेगी

बनेगा जो तन-मन से शिव का पुजारी

करे नाम लेकर सफ़ल अपना जीवन

करे नाम लेकर सफ़ल अपना जीवन

ये अनमोल जीवन यूँ ही ना गवाएँ

चलो शिव शंकर के मंदिर में भक्तों

शिवजी के चरणों में सर को झुकाए

करें अपने तन-मन को गंगा सा पावन

जपे नाम शिव का, भजन इनके गाएँ

चलो शिव शंकर के मंदिर में भक्तों

बुधवार, 4 दिसंबर 2024

भेजा है बुलावा, तूने शेरा वालिए

भेजा है बुलावा, तूने शेरा वालिए

"भेजा है बुलावा, तूने शेरा वालिए" एक भक्ति गीत है, जो माता वैष्णो देवी की महिमा और उनके दरबार में भक्तों की श्रद्धा को व्यक्त करता है। यह गीत श्रद्धालुओं की भावना को दर्शाता है, जो माता के दरबार में दर्शन करने के लिए बुलावे के बाद वहाँ आने की प्रतिज्ञा करते हैं। गीत में भक्तों का यह संदेश है कि जब माता का बुलावा आता है, तो वे किसी भी हाल में उनके दरबार में पहुँचते हैं और फिर कभी वहाँ से दूर नहीं जाते।

गीत की शुरुआत होती है भक्त के द्वारा माता के बुलावे का आह्वान करने से, जिसमें वे कहते हैं कि माता ने उन्हें अपने दरबार में बुलाया है, और वह वहाँ आने के बाद फिर कभी वापस नहीं जाएंगे। "शेरा वालिए" का जिक्र करते हुए, गीत में माता के वीर और शक्तिशाली रूप को व्यक्त किया गया है। "शेरा वालिए" का अर्थ है "शेरों के साथ माता की महिमा", यह माता के साहस और शक्ति को दर्शाता है, जो अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।

गीत में यह भी कहा गया है कि भक्त माता के दर के भिखारी हैं, और उनके दरबार से बाहर जाने का कोई रास्ता नहीं है। एक बार माता के दर्शन के बाद, भक्त अपनी दुनिया और अपने पुराने रिश्तों को छोड़कर पूरी तरह से माता के मार्ग में समर्पित हो जाते हैं। माता के दरबार से जुड़ी एक "डोरी" (धागा) भक्तों की भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक बन जाती है, जो उन्हें हमेशा माता के साथ जोड़ती है।

गीत में माता के दिव्य रूप और उनकी उपस्थिति को भी दर्शाया गया है। माता के दर से ही पूरी दुनिया में उजाला फैलता है, उनकी खुशबू फूलों में, चाँद की चाँदनी में, सूरज की रौशनी में और नैनों की ज्योति में बसी हुई है। यह सब माता की असीम शक्ति और कृपा का संकेत है, जो हर जगह फैली हुई है।

1.    माता की दिव्य उपस्थिति: गीत में यह कहा गया है कि माता का आशीर्वाद और उनकी उपस्थिति हर जगह है — फूलों में, चाँद में, सूरज में, और यहाँ तक कि हमारी आँखों की ज्योति में भी।

2.    माता के बुलावे का महत्व: गीत में यह दिखाया गया है कि जब माता का बुलावा आता है, तो भक्त पूरी श्रद्धा से माता के दरबार में पहुँचते हैं और अपनी दुनिया की चिंता छोड़ देते हैं। एक बार माता के चरणों में समर्पण करने के बाद, वे फिर कभी नहीं लौटते।

3.    भक्ति और समर्पण: भक्त माता के दर में भिखारी बनकर आते हैं, और वे अपने जीवन को माता की भक्ति में समर्पित कर देते हैं। यह गीत यह संदेश देता है कि भक्तों को केवल माता के दर पर ही शांति और सुख मिलता है।

4.    माता की शक्ति: "शेरा वालिए" और "ज्योता वालिए" जैसे शब्दों से माता की शक्ति और उनके अद्वितीय रूप को दर्शाया गया है। माता के पास अनंत शक्ति है, जो हर भक्त की सहायता करती है।

यह गीत माता वैष्णो देवी के प्रति भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक है। यह उन भक्तों के दिलों की गहरी भावनाओं को व्यक्त करता है, जो माता के दर पर अपने जीवन को समर्पित करने के लिए आते हैं। "भेजा है बुलावा, तूने शेरा वालिए" गीत माता की कृपा, उनकी शक्ति और उनके अद्वितीय रूप का आभार व्यक्त करता है, जो हर भक्त की रक्षा करती हैं।

भेजा है बुलावा, तूने शेरा वालिए
ओ मैया तेरे दरबार,
में हाँ तेरे दीदार, कि मैं आऊंगा
कभी न फिर जाऊँगा

भेजा है बुलावा, तूने शेरा वालिए
ओ मैया तेरे दरबार,

शेरावालिये नी, माता ज्योता वालिए
नी सच्चियाँ ज्योता वालिए, लाटा वालिए

भेजा है बुलावा, तूने शेरा वालिए
ओ मैया तेरे दरबार,

तेरे ही दर के हैं हम तो भिखारी,
जाएं कहाँ यह दर छोड़ के, हाँ छोड़के ।
तेरे ही संग बँधी भक्तों ने डोरी,
सारे जहाँ से नाता तोड़ के, हाँ तोड़के ॥

शेरावालिये नी माता ज्योता वालिए
भवना वालिए नी माता लाटा वालिए

भेजा है बुलावा, तूने शेरा वालिए
ओ मैया तेरे दरबार,

फूलों में तेरी ही खुशबु है मैया,
चंदा में तेरी ही चांदनी, हाँ चांदनी ।
तेरे ही नूर से है नैनो की ज्योतियाँ,
सूरज में तेरी ही रौशनी, हाँ रौशनी ॥

शेरावालिये नी, माता ज्योता वालिए
नी सच्चियाँ ज्योता वालिए, लाटा वालिए

भेजा है बुलावा, तूने शेरा वालिए
ओ मैया तेरे दरबार,

भेजा है बुलावा, तूने शेरा वालिए
ओ मैया तेरे दरबार,
में हाँ तेरे दीदार, कि मैं आऊंगा
कभी न फिर जाऊँगा

भेजा है बुलावा, तूने शेरा वालिए
ओ मैया तेरे दरबार,

शेरावालिये नी, माता ज्योता वालिए
नी सच्चियाँ ज्योता वालिए, लाटा वालिए

मंगलवार, 3 दिसंबर 2024

महादेव शंकर हैं जग से निराले

महादेव शंकर हैं जग से निराले

"महादेव शंकर हैं जग से निराले" एक लोकप्रिय भक्ति गीत है जो भगवान शिव की महिमा, उनकी सरलता और उनकी कृपा को व्यक्त करता है। इस गीत में शिव के दिव्य और शांतिपूर्ण रूप का वर्णन किया गया है, जो जगत के महान और शक्तिशाली होते हुए भी बहुत भोले और सीधे हैं। गीत में भगवान शिव को उनके सरल, दयालु और कृपालु रूप में पूजा गया है, और भक्तों को उनके प्रति अपनी भक्ति और श्रद्धा व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया गया है।

गीत की शुरुआत होती है भगवान शिव के रूप की चर्चा से, जिनकी महिमा और विशेषताएँ अद्वितीय हैं। भगवान शिव को "जग से निराले" यानी दुनिया से अलग, और "बड़े सीधे-सादे, बड़े भोले-भाले" बताया गया है, जो उनकी सरलता और निष्कलंकता को दर्शाता है। भगवान शिव, जो अपने भक्तों के लिए सच्चे और बिना किसी शर्त के प्रेम देने वाले हैं, वे हमेशा अपनी महिमा में निपुण होते हुए भी बहुत विनम्र और भोले होते हैं।

गीत में यह भी कहा गया है कि शिव जी के दर्शन और उनकी भक्ति से जीवन में कभी भी निराशा नहीं आती। जो व्यक्ति भगवान शिव को अपने जीवन का आदर्श और आशा मानता है, वह जीवन में किसी भी प्रकार के दुख-दर्द से मुक्त हो जाता है। उनका आशीर्वाद बिना मांगे ही प्राप्त होता है, क्योंकि वे हर एक भक्त के दिल की भाषा को समझते हैं और उनकी इच्छाओं का सम्मान करते हैं।

गीत में शिव के बारे में यह भी बताया गया है कि वे अंधेरे और उजाले के मालिक हैं, और जो व्यक्ति शिव के दर पर अपनी श्रद्धा और विश्वास रखता है, उसकी झोली भर जाती है। वह भक्त जो अपने जीवन में पूरी तरह से शिव के प्रति समर्पित होता है, वह निराश नहीं होता और उसकी इच्छाएँ पूरी होती हैं।

1.    भगवान शिव की महिमा: भगवान शिव को "जग से निराले" और "बड़े सीधे-सादे" के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो उनकी सरलता और दयालुता को दर्शाता है। वे अपने भक्तों की सभी इच्छाओं को पूरी करते हैं, बिना किसी शर्त के।

2.    भक्ति से जीवन में सुख: गीत में यह बताया गया है कि भगवान शिव की भक्ति से जीवन में कभी निराशा नहीं आती। जब किसी व्यक्ति का विश्वास भगवान शिव पर होता है, तो उसके जीवन में हर कठिनाई हल हो जाती है।

3.    शिव का आशीर्वाद: गीत के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि भगवान शिव का आशीर्वाद बिना मांगे प्राप्त होता है। वे हर भक्त की प्रार्थना को सुनते हैं और उनकी इच्छाओं का सम्मान करते हैं।

4.    अंधेरे और उजाले में शिव का साथ: भगवान शिव का अंधेरे और उजाले में समान रूप से साथ होता है। उनके भक्त कभी अकेले नहीं होते क्योंकि भगवान शिव हमेशा उनके साथ होते हैं, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों।

"महादेव शंकर हैं जग से निराले" एक भक्ति गीत है, जो भगवान शिव के सरल और भोले रूप को सम्मानित करता है। इस गीत में शिव की महिमा और उनके आशीर्वाद की शक्ति को गाया गया है, जो भक्तों को उनके जीवन में शांति, समृद्धि और सफलता प्रदान करता है। गीत में भक्तों को यह संदेश दिया गया है कि भगवान शिव को अपना आशीर्वाद देने वाला मानकर, उन पर विश्वास करना चाहिए, क्योंकि वे हर कठिनाई में हमारे साथ हैं और हमारे जीवन को सहज और खुशहाल बना सकते हैं।

महादेव शंकर हैं जग से निराले

बड़े सीधे-सादे, बड़े भोले-भाले

महादेव शंकर हैं जग से निराले

बड़े सीधे-सादे, बड़े भोले-भाले

मेरे मन के मंदिर में रहते हैं शिव जी

ये मेरे नयन हैं उन्हीं के शिवालय

महादेव शंकर हैं जग से निराले

बड़े सीधे-सादे, बड़े भोले-भाले

मेरे मन के मंदिर में रहते हैं शिव जी

ये मेरे नयन हैं उन्हीं के शिवालय

महादेव शंकर हैं जग से निराले

बड़े सीधे-सादे, बड़े भोले-भाले

बना लो उन्हें अपने जीवन की आशा

सदा दूर तुम से रहेगी निराशा

बना लो उन्हें अपने जीवन की आशा

सदा दूर तुम से रहेगी निराशा

बिना माँगे वरदान तुम को मिलेगा

समझते हैं वो तो हर एक मन की भाषा

वो उनके हैं जो उनको अपना बना लें, हो-हो-हो

महादेव शंकर हैं जग से निराले

बड़े सीधे-सादे, बड़े भोले-भाले

जिधर देखो, शिव की है महिमा निराली

ये दाता है और सारी दुनिया सवाली

जिधर देखो, शिव की है महिमा निराली

ये दाता है और सारी दुनिया सवाली

जो इस द्वार पे अपना विश्वास कर ले

तो पल-भर में भर जाएगी झोली खाली

उन्हीं के अँधेरे, उन्हीं के उजाले, हो-हो-हो

महादेव शंकर हैं जग से निराले

बड़े सीधे-सादे, बड़े भोले-भाले

मेरे मन के मंदिर में रहते हैं शिव जी

ये मेरे नयन हैं उन्हीं के शिवालय

महादेव शंकर हैं जग से निराले

बड़े सीधे-सादे, बड़े भोले-भाले

बड़े सीधे-सादे, बड़े भोले-भाले

सोमवार, 2 दिसंबर 2024

शिव-शंकर को जिसने पूजा उसका ही उद्धार हुआ

शिव-शंकर को जिसने पूजा उसका ही उद्धार हुआ

"भोले शंकर की पूजा करो" एक भक्ति गीत है जो भगवान शिव की महिमा और उनके भक्तों के प्रति अनुग्रह को प्रस्तुत करता है। इस गीत में भगवान शिव को "भोले शंकर" के रूप में चित्रित किया गया है, जो दीन-दुखियों के रक्षक, जगत के पिता और सभी प्राणियों के पालनहार हैं। यह गीत भगवान शिव के दिव्य रूप और उनके प्रति भक्ति के महत्व को दर्शाता है।

गीत की शुरुआत होती है भगवान शिव की पूजा और भक्ति की महिमा के वर्णन से। इसमें बताया गया है कि जो व्यक्ति भगवान शिव की पूजा करता है, उसका उद्धार होता है और वह अंतकाल में भव-सागर (जीवन के बंधन) से पार हो जाता है। भगवान शिव का ध्यान और पूजा करने से उनके चरणों में शरण लेने वाले भक्त को सुख, शांति और मोक्ष मिलता है।

गीत में शिव की दयालुता, उनका भक्तों के प्रति प्रेम और उनके शक्ति देने वाले स्वरूप का उल्लेख है। भगवान शिव को "डमरू वाला" कहा गया है, जो अपनी डमरू की आवाज से सृष्टि को संचालित करते हैं। वह दीन-दुखियों के संकटों का निवारण करते हैं और उनके जीवन में आशा की किरण होते हैं। इस गीत में शिव की महिमा का बखान किया गया है, जिसमें उनके नाम की पूजा से विशेष लाभ और वरदान की बात की गई है।

भगवान शिव का नाम "महादेव" है, और सभी देवता उनकी वंदना करते हैं, क्योंकि उनका नाम और पूजा से ही मनुष्य को शक्ति और आशीर्वाद प्राप्त होते हैं। इस गीत में यह भी कहा गया है कि शिव की पूजा से हर प्राणी, चाहे वह नाग हो, असुर हो या सामान्य प्राणी हो, उसे उनका आशीर्वाद और उपकार प्राप्त होता है। शिव की पूजा से ही भक्तों का उद्धार और कल्याण होता है।

  • भगवान शिव के प्रति भक्ति से जीवन के सभी कष्टों का निवारण होता है।
  • शिव की पूजा से आत्मा को शांति मिलती है और भक्तों को जीवन के हर मोड़ पर सहारा मिलता है।
  • भगवान शिव का दयालु रूप और उनका प्रेमपूर्ण आशीर्वाद भक्तों को अपने जीवन में शक्ति और प्रेरणा प्रदान करता है।
  • "भोले शंकर की पूजा करो" का संदेश है कि अगर कोई सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करता है, तो उसका उद्धार निश्चित होता है, और वह भव-सागर से पार हो जाता है।

यह गीत शिव की भक्ति और उनके प्रति श्रद्धा को प्रकट करने का एक प्रभावी माध्यम है, जो श्रोताओं को भगवान शिव के साथ जुड़ने और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है।

शिव-शंकर को जिसने पूजा उसका ही उद्धार हुआ

शिव-शंकर को जिसने पूजा उसका ही उद्धार हुआ

अंतकाल को भव-सागर में उसका बेड़ा पार हुआ

भोले शंकर की पूजा करो, ध्यान चरणों में इसके धरो

भोले शंकर की पूजा करो, ध्यान चरणों में इसके धरो

डमरू वाला है जग में दयालु बड़ा

दीन-दुखियों का दाता, जगत का पिता

डमरू वाला है जग में दयालु बड़ा

दीन-दुखियों का दाता, जगत का पिता

सब पे करता है ये भोला शंकर दया

सबको देता है ये आसरा

सबको देता है ये आसरा

इन पावन चरणों में अर्पण आकर जो इक बार हुआ

अंतकाल को भव-सागर में उसका बेड़ा पार हुआ

नाम ऊँचा है सबसे महादेव का

वंदना इसकी करते हैं सब देवता

नाम ऊँचा है सबसे महादेव का

वंदना इसकी करते हैं सब देवता

इसकी पूजा से वरदान पाते हैं सब

शक्ति का दान पाते हैं सब

शक्ति का दान पाते हैं सब

नाग, असुर, प्राणी सब पर ही भोले का उपकार हुआ

नाग, असुर, प्राणी सब पर ही भोले का उपकार हुआ

अंतकाल को भव-सागर में उसका बेड़ा पार हुआ

शिव-शंकर को जिसने पूजा उसका ही उद्धार हुआ

शिव-शंकर को जिसने पूजा उसका ही उद्धार हुआ

अंतकाल को भव-सागर में उसका बेड़ा पार हुआ

भोले शंकर की पूजा करो, ध्यान चरणों में इसके धरो 

रविवार, 1 दिसंबर 2024

सुनो सुनो एक कहानी सुनो

 सुनो सुनो एक कहानी सुनो

"सुनो सुनो एक कहानी सुनो" एक लोकप्रिय भक्ति गीत है, जो माँ की महिमा और भक्तों के प्रति उनकी ममता को बयां करता है। यह गीत एक भक्त की कहानी पर आधारित है, जो अपनी माँ के प्रति अपार श्रद्धा और भक्ति रखता है। यह गीत माँ के प्रति भक्त की विश्वास, त्याग, और भक्ति को प्रस्तुत करता है।

गीत की शुरुआत होती है एक आमंत्रण से, जहाँ गायक श्रोताओं को एक कहानी सुनाने का आह्वान करता है। यह कहानी एक भक्त की है, जो कटरे नामक स्थान पर रहता था और हमेशा माँ के गुण गाता था। एक दिन भैरव नामक व्यक्ति ने उससे कहा कि वह अपने घर कई साधुओं के साथ भोजन के लिए आएगा। भक्त को चिंता हुई कि वह खुद भूखा था, तो साधुओं का आदर कैसे करेगा। तब माँ ने उसे आश्वस्त किया कि वह चिंता न करे, वह सभी को भोजन देगी।

जब भैरव और साधु भोजन के लिए आए, तो भैरव ने माँ से माँस और मदिरा लाने की मांग की, लेकिन माँ ने उसे सबक सिखाया। वह अपने भक्त की रक्षा करने के लिए एक चमत्कार दिखाती है, जिससे भैरव का सर अलग हो जाता है। इसके बाद भैरव का सर जहां गिरा, वहां भैरव मंदिर बना।

गीत में माँ की महिमा और भक्त की निष्ठा को बहुत सुंदर रूप से प्रस्तुत किया गया है। यह गीत यह दर्शाता है कि माँ की ममता अनमोल है और वह अपने भक्तों की रक्षा करने के लिए हर स्थिति में उन्हें मार्गदर्शन देती हैं।

  • माँ की ममता और भक्ति का महत्व।
  • जब भक्त सच्चे दिल से माँ से प्रार्थना करता है, तो वह उसकी हर मुश्किल को दूर कर देती है।
  • गीत का संदेश है कि माँ की महिमा अपरंपार है, और उनकी कृपा से ही भक्तों को हर संकट से मुक्ति मिलती है।

यह गीत न केवल भक्तों को माँ की भक्ति और महिमा का एहसास कराता है, बल्कि उनके आत्मविश्वास और भक्ति को भी प्रोत्साहित करता है।

सुनो सुनो, सुनो सुनो

सुनो सुनो एक कहानी सुनो

सुनो सुनो एक कहानी सुनो

 

ना राजा की ना रानी की

ना आग हवा ना पानी की

ना कृष्णा की ना राधा रानी की

दूध छलकता है आँचल से हो ओ ओ

दूध छलकता है आँचल से

आँख से बरसे पानी

माँ की ममता की है ये कहानी

सुनो सुनो, सुनो सुनो...

 

एक भक्त जो दिन हिन था

कटरे में रहता था

माँ के गुण गाता था

माँ के चरण सदा कहता था

 

सुनो सुनो सुनो सुनो

 

एक बार भैरव ने उससे कहा की कल आएंगे

कई साधुओ सहित तुम्हारे घर खाना खाएंगे

माँ के भक्त ने सोचा कैसे उनका आदर होगा

बिन भोजन के साधुजनों का बड़ा निरादर होगा

 

सुनो सुनो, सुनो सुनो

 

माता से विनती की उसने अन्न कहाँ से लाऊँ

मैं तो खुद भूखा हूँ भोजन कैसे उन्हें खिलाऊँ

माँ ने कहा तू चिंता मत कर कल तु उन्हें बुलाना

उनके साथ ये सारा गाँव खाएगा तेरा खाना

 

सुनो सुनो, सुनो सुनो

 

नमन किया उसने माता को आ गया घर बेचारा

दूजे दिन देखा क्या उसने भरा है सब भंडारा

 

सुनो सुनो, सुनो सुनो

 

उस भैरव ने जिसने ये सारा षडयंत्र रचाया

कई साधुओ सहित जीमने उसके घर पे आया

अति शुद्ध भोजन को देख के बोला माँस खिलाओ

जाओ हमारे लिए कहीं से मदिरा ले कर आओ

 

सुनो सुनो, सुनो सुनो

 

आग बबूला हो गया जब उसने देखा भंडारा

क्रोध से भरके जोर से उसने माता को ललकारा

माँ आई तो उसने कस के माँ के हाथ को पकड़ा

हाथ छुड़ा कर भागी माता देख रहा था कटरा

 

अपनी रक्षा के खातिर एक चमत्कार दिखलाया

वो अस्थान छुपी जहा माता गरबजून कहलाया

नौ मास का छुपकर माँ ने वही समय गुजारा

समय हुआ पूरा तब माँ ने भैरव को संहारा

धड़ से सर को जुदा किया थी ज्वाला माँ के अंदर

जहा गिरा सर भैरब का वहां बना है भैरव मंदिर

 

सुनो सुनो, सुनो सुनो

 

अपरम्पार है माँ की महिमा जो कटरे में आये

माँ के दर्शन करके फिर भैरव के मंदिर जाए

 

सुनो सुनो सुनो सुनो, सुनो सुनो सुनो सुनो

सुनो सुनो एक कहानी सुनो

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