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शुक्रवार, 8 नवंबर 2024

ऐ मेरे कान्हा, भूल न जाना

ऐ मेरे कान्हा, भूल न जाना

"ऐ मेरे कान्हा, भूल न जाना" एक गहरी भक्ति भावना से भरा हुआ भजन है, जो भगवान श्री कृष्ण के प्रति भक्त की अपार श्रद्धा और विश्वास को व्यक्त करता है। इस भजन में भक्त अपने ईश्वर से निवेदन करता है कि वह कभी भी उसे न भूलें और हमेशा अपनी कृपा से उसका साथ दें। भजन में भगवान कृष्ण के अद्वितीय गुण, उनकी लीलाएं, और उनके प्रति भक्त की अडिग श्रद्धा को बड़े सुंदर तरीके से व्यक्त किया गया है। आइए इस भजन के प्रमुख अंशों पर एक विस्तृत नजर डालते हैं:

आस है तू मेरी, मैं तेरे आसरे:- यह पंक्ति एक भक्त की अत्यधिक भक्ति और विश्वास को दर्शाती है। भक्त कहता है कि उसकी सारी उम्मीदें, उसकी सारी आशाएं भगवान श्री कृष्ण पर टिकी हुई हैं। वह पूरी तरह से कृष्ण के आसरे में है और उन्हें अपनी रक्षा और मार्गदर्शन के लिए पुकारता है।

रात कली जो है, प्रथा बन जायेगी:- यहाँ पर भक्त अंधकार से प्रकाश की ओर जाने की बात कर रहा है। रात का काला अंधकार, जो अस्थायी रूप से किसी कठिनाई या समस्या का प्रतीक है, वह भगवान की कृपा से समाप्त हो जाएगा। जब भगवान चाहते हैं, तो कोई भी मुश्किल केवल उनके आशीर्वाद से हल हो सकती है।

तू बना ले अगर, बात बन जायेगी:- यह पंक्ति एक भक्त का विश्वास है कि अगर भगवान चाहें तो कोई भी कठिन कार्य आसानी से पूरा हो सकता है। यह कृष्ण के कृपालु स्वभाव को दर्शाती है कि वे अपने भक्तों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं, बस भक्त को पूरी श्रद्धा से उनसे जुड़ने की आवश्यकता है।

मन-सुदामा तड़प के पुकारे तुझे:- यहाँ भक्त सुदामा के उदाहरण से जुड़कर कृष्ण के प्रति अपनी तड़प और चाहत को व्यक्त कर रहा है। सुदामा ने अपनी गरीबी के बावजूद भगवान श्री कृष्ण से स्नेह किया था, और भगवान ने उनकी महान भक्ति के बदले उनका उद्धार किया। यह पंक्ति यह दर्शाती है कि भगवान अपने भक्तों के दिलों की पुकार कभी नहीं नकारते।

नांगे पानवोन हारी दौड़े आना:- इस पंक्ति में भगवान कृष्ण के प्रति भक्त की गहरी भक्ति और विश्वास व्यक्त किया गया है। "नांगे पानवोन हारी" का अर्थ है कि जैसे भगवान कृष्ण ने कभी भी अपने भक्तों को निराश नहीं किया, वैसे ही भक्त चाहता है कि जब वह संकट में हो, तो कृष्ण दौड़ते हुए उसकी मदद करें।

अंतरा :- यह अंतरा भगवान कृष्ण की लीलाओं का स्मरण कराता है:

·       "एक उंगली पर पर्वत उठाया प्रभु" – यह पंक्ति भगवान कृष्ण के अद्वितीय बल को दर्शाती है, जैसे उन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठाकर अपने भक्तों की रक्षा की।

·       "डूबती आस को था बचाया प्रभु" – कृष्ण ने अपनी लीलाओं से संकट में फंसे हुए लोगों की उम्मीद को बचाया। यह पंक्ति बताती है कि भगवान अपने भक्तों की आस को कभी टूटने नहीं देते।

·       "कौरवों की सभा जब अधर्मी हुई" – जब कौरवों ने पांडवों के साथ अन्याय किया और उनकी सभा में अधर्म हुआ, तब भगवान ने अपनी विराट रूप से उनके अधर्म को नष्ट किया।

·       "रूप विक्राल तूने दिखाया प्रभु" – यहाँ भगवान कृष्ण के विराट रूप का उल्लेख है, जो उन्होंने अर्जुन को गीता के संवाद के दौरान दिखाया। भगवान का यह रूप अत्यधिक भव्य और दैवीय था।

·       "सारी लीलाएं हैं तुझसे ही लीलाधर" – भगवान कृष्ण की सारी लीलाएं, उनके चमत्कारी कार्य, उनके आदर्श और उनका जीवन पूरी तरह से उनकी दिव्यता और महिमा से भरा हुआ है।

हम अभागों पे भी श्याम रखना नजर:- यह पंक्ति भक्त के दिल से निकला एक निवेदन है, जिसमें वह भगवान श्री कृष्ण से अपनी कृपा और आशीर्वाद की याचना करता है। भक्त अपनी कृतियों और परिस्थितियों को लेकर स्वयं को अभागा महसूस करता है, लेकिन भगवान से उसकी उम्मीद रहती है कि वह कभी भी अपनी कृपा से उसे न छोड़े।

प्रहार वचन प्रेम का सब सेज तोड़ दें:- यह पंक्ति बताती है कि भगवान का प्रेम और आशीर्वाद इतनी ताकतवर होते हैं कि वे सभी बंधनों, संकटों और कठिनाइयों को तोड़कर अपने भक्तों को सुख, शांति और उद्धार प्रदान करते हैं।

जब सहारे जगत के सभी छोड़ दें:- इसका मतलब है कि जब इस संसार में सभी लोग और वस्तुएं हमें असहाय महसूस कराती हैं, तब केवल भगवान श्री कृष्ण ही ऐसे हैं, जो अपने भक्तों का साथ नहीं छोड़ते। वे हमेशा अपने भक्तों के सहारे होते हैं, चाहे परिस्थिति जैसी भी हो।

हाथ करुणा का मोहन बढ़ाना:- यह पंक्ति भगवान कृष्ण से करुणा और दया का हाथ बढ़ाने की प्रार्थना है। "मोहन" भगवान कृष्ण का एक नाम है, और भक्त उनसे कृपा की याचना कर रहा है कि वह अपनी करुणा का हाथ आगे बढ़ाएं और उन्हें बचाएं।

ऐ मेरे कान्हा, भूल न जाना:- यह अंतिम पंक्ति भगवान श्री कृष्ण से एक अत्यधिक भावुक निवेदन है। भक्त कहता है कि चाहे वह किसी भी परिस्थिति में हो, कृपया भगवान उसे कभी न भूलें और हमेशा उसकी मदद करें।

यह भजन भगवान श्री कृष्ण के प्रति अत्यधिक श्रद्धा, विश्वास और भक्ति का प्रतीक है। भक्त भगवान कृष्ण से यह प्रार्थना करता है कि वे कभी उसे न भूलें और हमेशा अपनी कृपा से उसका साथ दें। इस भजन में भगवान के उन अद्वितीय गुणों का उल्लेख किया गया है, जिनके कारण वह अपने भक्तों के लिए कभी भी तैयार रहते हैं। यह भजन हमें यह सिखाता है कि भक्ति का मार्ग विश्वास, प्रेम और आस्था से भरा हुआ है, और भगवान का प्रेम हमारे जीवन में हर मुश्किल को आसान बना सकता है।

आस है तू मेरी

मैं तेरे आसरे..

ध्यान रखना मेरा

हे कन्हैया मेरे..

रात कली जो है

प्रथा बन जायेगी..

तू बना ले अगर

बात बन जायेगी..

मन-सुदामा तड़प के

पुकारे तुझे,

नांगे पानवोन हारी

दौड़े आना!

हे मेरे कान्हा, भूल ना जाना!

अंतरा-

एक उंगली पर पर्वत उठाया प्रभु..

डूबती आस को था बचाया प्रभु..

कौरवों की सभा जब अधर्मी हुई,

रूप विक्राल तूने दिखाया प्रभु..

सारी लीलाएं हैं

तुझसे ही लीलाधर..

हम अभागों पे भी

श्याम रखना नजर..

प्रहार वचन प्रेम का सब सेज तोड़ दें..

जब सहारे जगत के सभी छोड़ दें..

हाथ करुणा का मोहन बढ़ाना

ऐ मेरे कान्हा, भूल न जाना

मंगलवार, 5 नवंबर 2024

सिया-राम

 सिया-राम

यह गीत भगवान श्रीराम और माता सीता की भक्ति और उनकी महिमा का गान करता है। इसमें राम-सीता के नाम का बार-बार उच्चारण करके उनके पवित्र जीवन और गुणों का बखान किया गया है। यह भक्ति गीत विशेष रूप से भक्ति भाव और धार्मिक उल्लास को प्रकट करने वाला है। नीचे इस गीत के प्रमुख अंशों का विवरण किया गया है

कौशल्या-दशरथ के नंदन – “कौशल्या और दशरथ” भगवान श्रीराम के माता-पिता थे। इस पंक्ति में श्रीराम के जन्म का उल्लेख है, जो भारतीय हिंदू धर्म में अत्यधिक महत्व रखते हैं। श्रीराम को दशरथ और कौशल्या का पुत्र और रघुकुल का नायक कहा गया है।

राम ललात पे शोभित चन्दन - श्रीराम के माथे पर चन्दन का होना उनके पवित्र और शुभ स्वभाव का प्रतीक है। चन्दन को एक शुद्ध और दिव्य वस्तु माना जाता है, जो भगवान के शरीर पर शोभित होती है, यह उनके दिव्य रूप का दर्शक है।

रघुपति की जय बोले लक्ष्मण - लक्ष्मण, श्रीराम के भाई, हमेशा उनके प्रति निष्ठावान रहे। यहाँ पर लक्ष्मण के द्वारा रघुकुल के राजा श्रीराम की जय का उच्चारण किया जा रहा है, जो उनके भक्तिभाव को प्रदर्शित करता है।

राम-सिया का अभिनंदन - श्रीराम और माता सीता की जोड़ी को आदर्श माना जाता है। इस पंक्ति में उनके सम्मान और पूजा का वर्णन किया गया है। राम और सीता का मिलन सर्वोत्तम है और उनका अभिनंदन किया जा रहा है।

अंजनी पुत्र पड़े हैं चरणों में - यहाँ पर हनुमान जी का संदर्भ है, जो अंजनी और केसरी के पुत्र हैं। हनुमान जी भगवान राम के परम भक्त और उनके चरणों में हमेशा समर्पित रहते थे। उनकी भक्ति को यह पंक्ति दर्शाती है।

राम-सिया जपते तन-मन में - भक्तों के तन और मन में राम और सीता के नाम का जाप होने का वर्णन है। यह मन और आत्मा की शुद्धता और भक्ति की प्रक्रिया को इंगीत करता है। जब भगवान राम का नाम लिया जाता है, तो भक्तों का जीवन धन्य और सुखमय हो जाता है।

मंगल भवन अमंगल हारी - इस पंक्ति में भगवान श्रीराम को 'मंगल भवन' और 'अमंगल हारी' के रूप में चित्रित किया गया है। श्रीराम सभी शुभताओं के अधिपति हैं और वे किसी भी अमंगल (विपत्ति या बुराई) को दूर करने वाले हैं।

द्रवहु सुदशरथ अजर बिहारी - यह पंक्ति भगवान श्रीराम की अजर-अमरता और उनके शाश्वत स्वरूप को संदर्भित करती है। भगवान श्रीराम, जो दशरथ के पुत्र थे, वे भगवान विष्णु के अवतार हैं, जिनकी शक्ति और दिव्यता अनंत है।

राम, सिया-राम, सिया-राम, जय-जय राम - इस भक्ति गीत में मुख्य मंत्र "राम, सिया-राम, सिया-राम, जय-जय राम" का कई बार उच्चारण किया गया है। यह पंक्ति भक्तों द्वारा भगवान राम और सीता के नाम का उच्चारण करने का आदान-प्रदान करती है, जिससे भक्तों में भक्ति का उल्लास और श्रद्धा का संचार होता है।

तू ही सिया का, राम का, राधा का तू ही श्याम - यह पंक्ति भगवान राम और कृष्ण के अद्वितीय रूप को दर्शाती है। भगवान राम और कृष्ण दोनों ही भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं। साथ ही, श्रीराम और श्रीकृष्ण दोनों का ही जीवन भक्तों के लिए आदर्श है।

मीरा का तू भजन, भजते हरि पवन - मीरा बाई के भजनों का उल्लेख किया गया है, जो भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी अपार भक्ति को दर्शाते हैं। यहाँ पर, मीरा की भक्ति और हरि के प्रति अनन्य प्रेम को शिरोधार्य किया गया है।

तुलसी में भी लिखी ये बात है - इस पंक्ति में प्रसिद्ध संत तुलसीदास का उल्लेख किया गया है, जिनकी रचना 'रामचरितमानस' भगवान श्रीराम के जीवन की गाथा है। उनका नाम और उनके द्वारा लिखी गई भक्ति रचनाएँ राम के प्रति प्रेम और भक्ति को प्रमोट करती हैं।

टक्कर मारना - इस शब्द का प्रयोग भक्ति गीत में उत्साह और जोश को बढ़ाने के लिए किया गया है। यह शब्द भक्तों में ऊर्जा का संचार करता है और उनका उत्साह बढ़ाता है। "टक्कर मारना" का तात्पर्य है, भगवान के नाम के साथ पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ अपने जीवन को जीना और नकारात्मकताओं को नष्ट करना।

यह गीत भगवान श्रीराम और माता सीता की महिमा, उनके अद्वितीय रूप, और उनकी भक्ति के महत्व को गाता है। भक्तों द्वारा राम और सीता के नाम का बार-बार उच्चारण करके वे अपने जीवन को दिव्य बनाते हैं और भगवान की कृपा प्राप्त करते हैं।

 

कौशल्या-दशरथ के नंदन

राम ललात पे शोभित चन्दन

रघुपति की जय बोले लक्ष्मण

राम-सिया का अभिनंदन

अंजनी पुत्र पड़े हैं चरणों में

राम-सिया जपते तन-मन में

मंगल भवन अमंगल हारी

द्रवहु सुदशरथ अजर बिहारी

राम, सिया-राम, सिया- राम, जय-जय राम

राम, सिया-राम, सिया-राम, जय-जय राम

राम, सिया-राम, सिया-राम, जय-जय राम

राम, सिया-राम, सिया-राम, जय-जय राम

मात्र तन -मन, धड़कन में सिया-राम-राम हैं

मन-मंदिर के दर्पण में सिया-राम-राम हैं

तू ही सिया का, राम का, राधा का तू ही श्याम

जन्म-जन्म का ही ये साथ है

मीरा का तू भजन, भजते हरि पवन

तुलसी में भी लिखी ये बात है

मंगल भवन अमंगल हारी

द्रवहु सुदशरथ अजर बिहारी

राम, सिया-राम, सिया-राम, जय-जय राम

टक्कर मारना, सिया-राम, सिया-राम, जय-जय राम

राम, सिया-राम, सिया-राम, जय-जय राम

राम, सिया-राम, सिया-राम, जय-जय राम

राम, सिया-राम, सिया-राम, जय-जय राम

राम, सिया-राम, सिया-राम, जय-जय राम

राम, सिया-राम, सिया-राम, जय-जय राम

राम, सिया-राम, सिया-राम, जय-जय टक्कर मारना

राम, सिया-राम, सिया-राम, जय-जय राम

राम, सिया-राम, सिया-राम, जय-जय राम

राम, सिया-राम, सिया-राम, जय-जय राम

राम, सिया-राम, सिया -राम, जय-जय राम

सोमवार, 4 नवंबर 2024

राधे तू बड़भागिनी कौन तपस्या कीन्ह

राधे तू बड़भागिनी कौन तपस्या कीन्ह

यह भजन भगवान कृष्ण और राधा के प्रति भक्ति और प्रेम का अद्भुत उदाहरण है। इसमें राधा की महिमा, उनकी तपस्या, और कृष्ण के प्रति उनकी समर्पण भावना को दर्शाया गया है।

भजन की शुरुआत राधा की तपस्या की चर्चा से होती है, जो तीन लोकों को तारने वाली हैं। यह राधा की महानता और उनकी अद्वितीयता को उजागर करता है। मीरा बाई का उल्लेख भी होता है, जो भक्ति के प्रतीक हैं, और उनका त्याग इस भजन को गहराई प्रदान करता है।

कृष्ण का वर्णन, उनके रूप और मुरली की मधुर धुन, भक्तों के मन को छू जाती है। भजन में राधा और कृष्ण के रिश्ते की गहराई और भक्ति का उल्लास है।

कुल मिलाकर, यह भजन भक्ति, प्रेम, और समर्पण की भावना को उजागर करता है, जिसमें भक्त कृष्ण के चरणों में आत्मसमर्पण करते हैं और उनकी दिव्यता का गुणगान करते हैं।

राधे तू बड़भागिनी कौन तपस्या कीन्ह

तीन लोक तारन तारन सो तेरे अधीन

नी सा .. सा सा रे .. रे रे गा .. गा गा मा .. मा मा पा .. मा पा मा गा मा गा रे नी सा ..

एक ने त्यागी दुनिया डारि वो मीरा कहलायी

नी सा .. सा सा रे .. रे रे गा .. गा गा मा .. मा मा पा मा गा मा गा रे नी सा ..

दूजी राधा रानी बन के श्याम सलोना पाई..

मुझको भी तू अपना ले मन वृन्दावन बन जाये

मुझमें तू ही बस जाए और मन तुझमें राम जाए..

ओ मेरे कान्हा..ओ मेरे कान्हा..

ओ मात्र कान्हा.. ओ मेरे कान्हा..

जय जय राधा रमण हरि बोल

जय जय राधा रमण हरि बोल

जय जय राधा रमण हरि बोल

जय जय राधा रमण हरि बोल

धड़कन धड़कन राधिका

नस नस उड़ति प्रीत

बरसाने में गूंजता

मुरली का संगीत

हे मेरे कान्हा सब जान जपें तेरो नाम ही सुबह शाम

जो मन बैरागी वहीं कान्हा उनसे खुद छुप जाएगा

ओ मेरे कान्हा ओ मेरे कान्हा

ओ मेरे कान्हा ओ मेरे कान्हा

गोरे मुख पे तिल बन्यो

तांहि करो प्रणाम

मानो चंद बिछाई के

पौधे शालिग्राम

है दिखता जुगनू जगमग सूरज चंदा खुद से चमके ऐसे

खुद से चमके ऐसे..

आ…..

कान्हा के दर्शन में हर गोपी को जैसे.. हर गोपी को जैसे..

ओ मेरे कान्हा तेरा सेवक कर्ता तुझसे ही डरता है

ये धरती तुझसे घूमे नभ चूमें है कदम तेरे सरकार

ओ मेरे कान्हा ओ मेरे कान्हा

ओ मेरे कान्हा ओ मेरे कान्हा

जय जय राधा रमण हरि बोल

जय जय राधा रमण हरि बोल

जय जय राधा रमण हरि बोल

जय जय राधा रमण हरि बोल

जय जय राधा रमण हरि बोल

जय जय राधा रमण हरि बोल

जय जय राधा रमण हरि बोल

जय जय राधा रमण हरि बोल

जय जय राधा रमण

जय जय राधा रमण

जय जय राधा रमण

जय जय राधा रमण

जय जय राधा रमण

जय जय राधा रमण

हरि बोल

हरि बोल

हरि बोल

हरि बोल

हरि बोल

हरि बोल

हरि बोल

हरि बोल 

शनिवार, 2 नवंबर 2024

पता नहीं किस रूप में आकार नारायण मिल जाएगा

पता नहीं किस रूप में आकार  नारायण मिल जाएगा

यह गीत भक्ति और आध्यात्मिकता की गहराई को दर्शाता है। इसकी पंक्तियाँ प्रेम, विश्वास, और दयालुता के संदेश को फैलाती हैं।

ईश्वर की उपस्थिति:- गीत में हर स्थान और पल में भगवान के होने का जिक्र है, जो यह दर्शाता है कि ईश्वर हमारे चारों ओर है, हमें बस उसे देखने की दृष्टि चाहिए।

कर्मों का महत्व:- यह संदेश है कि जो हम बोते हैं, वही काटते हैं। अच्छे कर्म हमेशा फल देते हैं और नेकी का कोई मूल्य व्यर्थ नहीं जाता।

श्रद्धा और विश्वास:- श्रद्धा को सोने के समान बताया गया है, जो व्यक्ति की आंतरिक गहराई को दर्शाती है। हमें अपने विश्वास को मजबूत करना चाहिए।

समर्पण:- यह गीत हमें प्रेरित करता है कि हम दूसरों के लिए भी प्रेम और सहयोग के साथ रहें, क्योंकि यही सच्ची भक्ति है।

भावनात्मक तान:- गीत की मधुर तान और शब्दों का चयन इसे एक दिव्य अनुभव प्रदान करता है, जो सुनने वालों को प्रेरित और आत्मिक रूप से समृद्ध करता है। यह दर्शाता है कि हर पल में ईश्वर की अनुभूति संभव है, अगर हम अपने दिल को खोलें और सच्चे मन से भक्ति करें।

प्रेम प्रभु का बरस रहा है

पी ले अमृत प्यासे

सातों तीरथ तेरे अंदर

बहार किसे तलाशे

कण कण में हरि

क्षण क्षण में हरि

मुस्कुराओ में आशुवन में हरि

मन की आंखे तूने खोली

तो ही दर्शन पाएगा

पता नहीं किस रूप में आकर

नारायण मिल जाएगा

पता नहीं किस रूप में आकर

नारायण मिल जाएगा

नियति भेद नहीं करती

जो लेती है वो देती है

जो बोयेगा वो काटेगा

ये जग करमों की खेती है

नियति भेद नहीं करती

जो लेती है वो देती है

जो बोयेगा वो काटेगा

ये जग कर्मो की खेती है

यदि कर्म तेरे पावन है सभी

डूबेगी नहीं तेरी नाव कभी

तेरी बाह पकड़ने को

वो भेष बदल के आएगा

पता नहीं किस रूप में आकार

नारायण मिल जाएगा

पता नहीं किस रूप में आकार

नारायण मिल जाएगा

नेकी व्यर्थ नहीं जाती

हरी लेखा-जोखा रखते हैं

ओरो को फुल दिए जिसने

उसके भी हाथ महकते हैं

नेकी व्यर्थ नहीं जाती

हरी लेखा-जोखा रखते हैं

ओरो को फुल दिए जिसने

उसके भी हाथ महकते हैं

कोई दीप मिले तो बाती बन

तू भी तो किसी का साथी बन

मन को मानसरोवर कर ले

तो ही मोती पाएगा

पता नहीं किस रूप में आकार

नारायण मिल जाएगा

पता नहीं किस रूप में आकार

नारायण मिल जाएगा

कान लगाके बातें सुन ले

सूखे हुए दरख्तों की

लेता है भगवान परीक्षा

सबसे प्यारे भक्तों की

एक प्रश्न है गहरा जिसकी

हरी को थाह लगानी है

तेरी श्रद्धा सोना है

या बस सोने का पानी है

जो फूल धरे हर डाली पर

विश्वास तो रख उस माली पर

तेरे भाग में पत्थर है तो

पत्थर ही खिल जाएगा

पता नहीं किस रूप में आकर

नारायण मिल जाएगा

पता नहीं किस रूप मैं आकार

नारायण मिल जाएगा

पता नहीं किस रूप में आकार

नारायण मिल जाएगा

"हमने बहुत करीब से देखा है ज़िन्दगी को,

उतना ही पास रह गया, जो दे दिया किसी को।"

हरे कृष्ण हरे राम

 हरे कृष्ण हरे राम

ये सुंदर बोल भगवान कृष्ण को समर्पित एक भक्ति भजन से हैं, जो उनके प्रति गहरी भक्ति और प्रेम को व्यक्त करता है। दोहराए गए वाक्यांश कृष्ण की मधुरता और चंचल स्वभाव को उजागर करते हैं, विशेष रूप से उनकी मनमोहक बांसुरी (मुरली) और मक्खन चोर (माखन चोर) के रूप में उनकी भूमिका का संदर्भ देते हैं।

"हरे कृष्ण, हरे राम" मंत्र एक शक्तिशाली आह्वान के रूप में कार्य करता है, जिसका उद्देश्य शांति और आध्यात्मिक संबंध लाना है। यह इस विश्वास पर जोर देता है कि कृष्ण के प्रति समर्पण करने से दुख कम हो सकता है और खुशी मिल सकती है।

यह गीत कृष्ण और राधा के बीच के रिश्ते को भी दर्शाता है, जो आनंद और दिव्य प्रेम के क्षणों को दर्शाता है। विभिन्न नामों और रूपों के माध्यम से, भजन कृष्ण की सर्वव्यापकता और उनके भक्तों के जीवन में उनके द्वारा लाए गए आनंद का जश्न मनाता है। कुल मिलाकर, यह भक्ति की एक हार्दिक अभिव्यक्ति है, जो श्रोताओं को कृष्ण की दिव्य उपस्थिति में डूबने के लिए आमंत्रित करती है।

मधुर मुक्त मुरली हरि हाथ भाये
हरि दुख हरे जो हरि शरण आए !!

मधुर मुक्त मुरली हरि हाथ भाये
हरि दुख हरे जो हरि शरण आए !!

हरि दुख हरता हरि सुख करता
हरि हरि हर नाम जपना !!

हरे कृष्णा हरे कृष्णा
कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरे रामा हरे रामा
हरे रामा हरे हरे !!

हरे कृष्णा हरे कृष्णा
कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरे रामा हरे रामा
हरे रामा हरे हरे !!

श्याम तेरी मुरली मधुर धुन सुनाये
पनघट पे राधा खड़ी मुस्कुराये !!

हां श्याम तेरी मुरली मधुर धुन सुनाए
पनघट पे राधा खड़ी मुस्कुराये
हरि जगत के पालन हारी
माखन चोर हैं कृष्ण मुरारी !!

हरि दुख हरता हरि सुख करता
हरि हरि हर नाम जपना !!

हरे कृष्णा हरे कृष्णा
कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरे रामा हरे रामा
हरे रामा हरे हरे !!

हरे कृष्णा हरे कृष्णा
कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरे रामा हरे रामा
हरे रामा हरे हरे !!

गोविंद बोलो चाहे गोपाला बोलो
बंसीधर बोलो चाहे ब्रिज ग्वाला बोलो
गोविंद बोलो चाहे गोपाला बोलो
बंसीधर बोलो चाहे ब्रिज ग्वाला बोलो !!

गिरधारी बनवारी कान्हा कन्हैया
नंदलाला गोपाला मोहन कन्हैया
नंद किशोर कुंवर हरि नटवर
बांके बिहारी गोविंदा गिरिधर
केशव माधव श्याम मुरारी
नटवर नट नागर गिरधारी !!

हरि दुख हरता हरि सुख करता
हरि हरि हर नाम जपना !!

हरे कृष्णा हरे कृष्णा
कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरे रामा हरे रामा
हरे रामा हरे हरे !!

हरे कृष्णा हरे कृष्णा
कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरे रामा हरे रामा
हरे रामा हरे हरे !!

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