All Languages Translate

बुधवार, 23 अक्टूबर 2024

बिगड़ी मेरी बना दे, ऐ शेरोंवाली मैया

बिगड़ी मेरी बना दे, ऐ शेरोंवाली मैया

"बिगड़ी मेरी बना दे, ऐ शेरोंवाली मैया" एक प्रसिद्ध भजन है जो देवी दुर्गा की स्तुति में गाया जाता है। इस भजन में भक्त अपनी परेशानियों और समस्याओं का उल्लेख करते हुए माँ से कृपा की प्रार्थना करते हैं। "शेरोंवाली" का अर्थ है माँ दुर्गा, जो शक्ति और साहस की प्रतीक हैं। भक्त अपनी आस्था के साथ माँ से मदद की याचना करते हैं, जिससे उनकी बिगड़ी हुई जिंदगी सही हो सके। यह भजन भक्तों में ऊर्जा और विश्वास का संचार करता है।

सदा पापी से पापी को भी तुम, माँ, भव-सिंधु तारी हो
फँसी मझधार में नैया को भी पल में उबारी हो
ना जाने, कौन ऐसी भू

ल मुझसे हो गई, मैया
तुम अपने इस बालक को, माँ, मन से बिसारी हो

बिगड़ी मेरी बना दे...
मैया जी, मेरी मैया

बिगड़ी मेरी बना दे, ऐ शेरोंवाली मैया
बिगड़ी मेरी बना दे, ऐ शेरोंवाली मैया
बिगड़ी मेरी बना दे, ऐ शेरोंवाली मैया
(बिगड़ी मेरी बना दे, ऐ शेरोंवाली मैया)
(बिगड़ी मेरी बना दे, ऐ शेरोंवाली मैया)
(बिगड़ी मेरी बना दे...)

ओ, बिगड़ी मेरी बना दे, ऐ शेरोंवाली मैया
(बिगड़ी मेरी बना दे, ऐ शेरोंवाली मैया)
ऐ शेरोंवाली मैया, देवास वाली मैया
(ऐ शेरोंवाली मैया, देवास वाली मैया)
मैया, मेहरों...
अरे, ऐ मेहरों वाली मैया, ऐ खंडवा वाली मैया

अपना मुझे बना ले...
अपना मुझे बना ले, मेरी मैया
अपना मुझे बना ले, मेरी मैया
अपना मुझे बना ले, मेरी मैया

ए, मेरी मैया
(अपना मुझे बना ले) ऐ मेहरों वाली मैया
(अपना मुझे बना ले) ऐ मेहरों वाली मैया
बिगड़ी मेरी बना दे

दर्शन को मेरी अँखियाँ कब से तरस रही हैं
(दर्शन को मेरी अँखियाँ कब से तरस रही हैं)
मेरी अँखियाँ, माँ, मेरी ये अँखियाँ

दर्शन को मेरी अँखियाँ कब से तरस रही हैं
(दर्शन को मेरी अँखियाँ कब से तरस रही हैं)
हाँ, सावन के जैसे झर-झर-झर-झर
(सावन के जैसे झर-झर अँखियाँ बरस रही हैं)

दर पे मुझे बुला ले, मैया जी
ओ, दर पे मुझे बुला ले, मेरी मैया
दर पे मुझे बुला ले, मेरी मैया
दर पे मुझे बुला ले, मेरी मैया
(दर पे मुझे बुला ले, ऐ शेरोंवाली मैया)
(दर पे मुझे बुला ले, ऐ शेरोंवाली मैया)
बिगड़ी मेरी बना दे

आते हैं तेरे दर पे दुनिया के नर और नारी, माँ
(आते हैं तेरे दर पे दुनिया के नर और नारी)
आते हैं तेरे दर पे दुनिया के नर और नारी
सुनती हो सब की विनती, मैया
(सुनती हो सब की विनती) मेरी मैया शेरोंवाली

मुझको दरश दिखा दे...
मैया जी, मेरी मैया
मुझको दरश दिखा दे, ऐ मेहरों वाली मैया
(मुझको दरस दिखा दे, ऐ मेहरों वाली मैया)

ए मेरी मैया
(मुझको दरस दिखा दे) ए मेरी मैया
(मुझको दरस दिखा दे) ए मेरी मैया
(मुझको दरस दिखा) आ
(मुझको दरस दिखा) ओ
(मुझको दरस दिखा) आ
(मुझको दरस दिखा) आ
(मुझको दरस दिखा दे, ऐ मेहरों वाली मैया)
बिगड़ी मेरी बना दे

शर्मा पे, शेरोंवाली, दृष्टि दया की कर, माँ
(शर्मा पे, शेरोंवाली, दृष्टि दया की कर, माँ)
ऐ माँ, मेरी मैया
मेरी माँ, मेरी माँ, मेरी माँ

शर्मा पे मेरी मैया, दृष्टि दया की कर माँ
(शर्मा पे शेरोंवाली, दृष्टि दया की कर माँ)
चरणों की धूल देकर, देकर
चरणों की धूल देकर, लक्खा की झोली भर, माँ

मरते को अब जिला दे...
मैया जी, ओ, माँ
मरते को अब जिला दे, ऐ शेरोंवाली मैया
(मरते को अब जिला) ए मेरी मैया
(मरते को अब जिला) ए मेरी दाती
(मरते को अब जिला) आ
(मरते को अब जिला) ओ
(मरते को अब जिला) आ
(मरते को अब जिला) आ
(मरते को अब जिला दे, ऐ शेरोंवाली मैया)

बिगड़ी मेरी बना दे, ऐ शेरोंवाली मैया
(बिगड़ी मेरी बना दे, ऐ शेरोंवाली मैया)
बिगड़ी मेरी बना दे (ऐ, शेरोंवाली मैया)
(बिगड़ी मेरी बना दे, ऐ शेरोंवाली मैया)
(बिगड़ी मेरी बना दे, ऐ शेरोंवाली मैया)

ऐ शेरोंवाली मैया, देवास वाली मैया, माँ
(ऐ शेरोंवाली मैया, देवास वाली मैया) मैया
ऐ मेहरों वाली मैया, ऐ, खंडवा वाली मैया, मैया
(ऐ मेहरों वाली मैया, ऐ, खंडवा वाली मैया) हो

अपना मुझे बना ले, ऐ मेहरों वाली मैया
(अपना मुझे बना ले, ऐ मेहरों वाली मैया)
बिगड़ी मेरी बना दे, ऐ शेरोंवाली मैया
(बिगड़ी मेरी बना दे, ऐ शेरोंवाली मैया)

ऐ शेरोंवाली मैया
(बिगड़ी मेरी बना दे, ऐ शेरोंवाली मैया)
(बिगड़ी मेरी बना दे, ऐ शेरोंवाली मैया)
(बिगड़ी मेरी बना दे, ऐ शेरोंवाली मैया)

बिगड़ी मेरी बना दे...

मंगलवार, 22 अक्टूबर 2024

श्री हनुमान चालीसा

 श्री हनुमान चालीसा

"हनुमान चालीसा" भगवान हनुमान को समर्पित एक पूजनीय भक्ति भजन है। इसमें 40 छंद (चालीसा का मतलब चालीस) हैं जो हनुमान की शक्ति, भक्ति और चमत्कारी शक्तियों की प्रशंसा करते हैं।

यदि आप एक संक्षिप्त संस्करण या सारांश की तलाश में हैं, तो यह आमतौर पर निम्नलिखित विषयों पर प्रकाश डालता है:

1. भक्ति और विश्वास:- हनुमान के प्रति अटूट भक्ति के महत्व पर जोर देता है।

2. शक्ति और सुरक्षा:- हनुमान की अपार शक्ति और बुराई से बचाने वाले के रूप में उनकी भूमिका का जश्न मनाता है।

3. समर्पण और आशीर्वाद:- आशीर्वाद और मार्गदर्शन के लिए हनुमान के सामने समर्पण करने को प्रोत्साहित करता है।

दोहा 

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि |

वरनउ रघुवर विमल जसु, जो दायकु फल चारि ||

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार |

बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार ||

चौपाई 

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर, जय कपीस तिहुं लोक उजागर |

राम दूत अतुलित बल धामा, अंजनि-पुत्र पवन-सूत नामा |

महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी |

कंचन वरन विराज सुबेसा, कानन कुंडल कुंचित केसा |

हाथ वज्र और ध्वजा विराजे, कांधे मूंज जनेऊ साजे |

शंकर सुवन केसरी नंदन, तेज प्रताप महा जग बंदन |

विद्यावान गुणी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर |

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मन बसिया |

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखाया, विकट रूप धरि लंक जरावा |

भीम रूप धरि असुर संहारे, रामचन्द्र जी के काज संवारे |

लाय संजीवन लखन जियाये, श्री रघुबीर हरषि उर लाये |

रघुपति किन्हीं बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई |

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं, अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं |

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद सारद सहित अहिसा |

यम कुबेर दिगपाल जहाँ ते, कबि कोविद कहि सके कहाँ ते |

तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा, राम मिलाय राज पद दीन्हा |

तुम्हरो मंत्र विभीषन माना, लंकेश्वर भए सब जग जाना |

युग सहस्त्र जोजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू |

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं, जलधि लांघ गये अचरज नाहीं |

दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते |

राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे |

सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डरना |

आपन तेज सम्हारो आपै, तीनों लोक हांक ते कांपै |

भूत पिशाच निकट नहि आवै, महावीर जब नाम सुनावै |

नासै रोग हरे सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा |

संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम वचन ध्यान जो लावै |

सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुम साजा |

और मनोरथ जो कोई लावै, सोई अमित जीवन फल पावै |

चारो जुग प्रताप तुम्हारा, है प्रसिद्ध जगत उजियारा |

साधु संत के तुम रखवारे, असुर निकंदन राम दुलारे |

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता |

राम रसायन तुम्हारे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा |

तुम्हरे भजन राम को भावे, जनम जनम के दुख बिसरावै |

अंत काल रघुबर पुर जाई, जहाँ जन्म हरि-भक्ति कहाई |

और देवता चित्त न धरई, हनुमत सेई सर्व सुख करई |

संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा |

जे जे जे हनुमान गोसाई, कृपा करहु गुरु देव की नाई |

जो सत बार पाठ करे कोई, छुटहिं बंदि महा सुख होई |

जो यह पढ़े हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा |

तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय महँ डेरा |

|| दोहा ||

पवन तनय संकट हरन, मंगल मुरति रूप |

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप ||

देवकी नंदन तुमको वंदन

 देवकी नंदन तुमको वंदन

"देवकी नंदन तुमको वंदन रखते सबकी लाज" भगवान कृष्ण को समर्पित एक भावपूर्ण भक्ति गीत है, जिन्हें देवकी के पुत्र के रूप में पूजा जाता है। गीत गहरी भक्ति और श्रद्धा व्यक्त करते हैं, कृष्ण के सुरक्षात्मक और पोषण गुणों पर जोर देते हैं, जो अपने भक्तों के सम्मान की रक्षा करते हैं। यह गीत अक्सर धार्मिक समारोहों और त्योहारों के दौरान गाया जाता है, जिसमें प्रेम, भक्ति और कृष्ण की दिव्य कृपा का जश्न मनाया जाता है।

 

कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण

देवकी नंदन तुमको वंदन

रखते सबकी लाज

सबके स्वामी अन्तर्यामी

पूरण किज्जे काज

देवकी नंदन तुमको वंदन

रखते सबकी लाज

सबके स्वामी अन्तर्यामी

पूरण किज्जे काज

मन मंदिर में सजे बिहारी

मनमोहन तेरी छवि अति प्यारी

मन मंदिर में सजे बिहारी

मनमोहन तेरी छवि अति प्यारी

बंसी बजैया रास रचैया

तारनहार मेरे तुम ही खेवैया

तुमसे बड़ा कहाँ कौन कन्हैया

श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी

हे नाथ नारायण वासुदेव

श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी

हे नाथ नारायण वासुदेव

देवकी नंदन तुमको वंदन

रखते सबकी लाज

सबके स्वामी अन्तर्यामी

पूरण किज्जे काज

लीला अपरम्पार तेरी

तू माखन चोर कहावे

भवसागर से सबकी नैया

तू ही पार लगावे

भक्तों का सहारा

तू बासुरी वाला

मथुरा के बसैया

हे नन्द के लाला

तेरी भक्ति में नाचे सब

ता ता थैया

श्री कृष्ण गोविंद

श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारे

हे नाथ नारायण वासुदेव

हे नाथ नारायण वासुदेव

देवकी नंदन तुमको वंदन

रखते सबकी लाज

सबके स्वामी अन्तर्यामी

पूरण किज्जे काज

देवकी नंदन तुमको वंदन

रखते सबकी लाज

सबके स्वामी अन्तर्यामी

पूरण किज्जे काज

कृष्ण, कृष्ण..

रविवार, 20 अक्टूबर 2024

श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में

श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में

"श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में" एक पूजनीय भक्ति गीत है जो भगवान राम और सीता के बीच के गहरे बंधन को खूबसूरती से दर्शाता है। गीत के बोल उस अटूट प्रेम और भक्ति को दर्शाते हैं जो भक्तों के मन में दिव्य युगल के लिए है, जो हिंदू संस्कृति में उनके आध्यात्मिक महत्व पर जोर देता है।

यह गीत अक्सर धार्मिक समारोहों और त्योहारों के दौरान गाया जाता है, जो ईश्वर के प्रति श्रद्धा और जुड़ाव की भावनाओं को प्रेरित करता है। यह न केवल राम और सीता की प्रेम कहानी का जश्न मनाता है, बल्कि उनके कर्तव्य, सम्मान और भक्ति के आदर्शों का भी जश्न मनाता है, जो अनगिनत अनुयायियों के लिए नैतिक मार्गदर्शक के रूप में काम करते हैं।

संगीत की दृष्टि से, ट्रैक में आमतौर पर मधुर धुनें होती हैं जो इसकी भावनात्मक गहराई को बढ़ाती हैं, जिससे यह भजन प्रेमियों के बीच एक लोकप्रिय विकल्प बन जाता है। कुल मिलाकर, यह भक्ति गीत कई लोगों के दिलों में गूंजता है, उन्हें ईश्वर के भीतर मौजूद प्रेम और प्रतिबद्धता के पवित्र बंधन की याद दिलाता है।

 

ना चलाओ बाण,
व्यंग के ऐ विभिषण,
ताना ना सह पाऊं,
क्यूँ तोड़ी है ये माला,
तुझे ए लंकापति बतलाऊं,
मुझमें भी है तुझमें भी है,
सब में है समझाऊँ,
ऐ लंकापति विभीषण, ले देख,
मैं तुझको आज दिखाऊं।।

श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में,
देख लो मेरे दिल के नगीने में।।

मुझको कीर्ति ना वैभव ना यश चाहिए,
राम के नाम का मुझ को रस चाहिए,
सुख मिले ऐसे अमृत को पीने में,
श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में।।

अनमोल कोई भी चीज,
मेरे काम की नहीं,
दिखती अगर उसमे छवि,
सिया राम की नहीं ॥

राम रसिया हूँ मैं, राम सुमिरण करूँ,
सिया राम का सदा ही मै चिंतन करूँ,
सच्चा आनंद है ऐसे जीने में,
श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में ॥

फाड़ सीना हैं, सब को ये दिखला दिया,
भक्ति में मस्ती है, सबको बतला दिया,
कोई मस्ती ना, सागर को मीने में,
श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में ॥

श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने मे,
देख लो मेरे दिल के नगीने में ॥

All religious songs will be available in written form