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मंगलवार, 7 जनवरी 2025

जय लक्ष्मी माता

ॐ जय लक्ष्मी माता

गाना "ॐ जय लक्ष्मी माता" माता लक्ष्मी की महिमा और उनके दिव्य रूप का वर्णन करने वाला एक सुंदर भक्ति गीत है। यह गीत विशेष रूप से धन, समृद्धि, सुख, और समृद्धि की देवी माता लक्ष्मी की पूजा में गाया जाता है। इस गीत में माता लक्ष्मी के महान गुण, उनकी कृपा, और उनके द्वारा प्रदान किए गए आशीर्वाद का गुणगान किया गया है।

1.      प्रारंभिक श्लोक: गीत की शुरुआत "ॐ जय लक्ष्मी माता" के उद्घोषण से होती है, जो माता लक्ष्मी की आराधना और उनकी महिमा का प्रतीक है। यह नारा माता लक्ष्मी की महानता और उनके शक्ति के प्रतीक के रूप में लिया जाता है। गीत में कहा जाता है कि माता लक्ष्मी का हर विष्णु जी से गहरा संबंध है और वे ही सभी जगत के पालनहार हैं। उनकी उपासना से जीवन में सुख, समृद्धि और वैभव आता है।

2.      माता लक्ष्मी का दिव्य रूप:

o    दूसरे श्लोक में, माता लक्ष्मी को उमा और राम भरमाणी के रूप में चित्रित किया गया है। यह दर्शाता है कि वे सभी देवियों की माता हैं और ब्रह्मा, विष्णु, महेश (शिव) और सभी अन्य देवताओं से उच्च हैं।

o    सूर्य और चंद्रमा तथा नारद ऋषि भी माता लक्ष्मी की महिमा का गुणगान करते हैं, जो दर्शाता है कि वे सभी संसार के उच्चतम रूप हैं और उनकी पूजा से संसार का कल्याण होता है।

3.      माता लक्ष्मी का शरण:

o    गीत में माता लक्ष्मी को दुर्गा रूप में भी बताया गया है, जो निरंजन और शक्तिशाली हैं। वे सुख और समृद्धि की दाता हैं, और जो कोई भक्त उन्हें श्रद्धा भाव से पूजा करता है, उसे रिद्धि और सिद्धि प्राप्त होती है।

o    यहाँ यह संदेश दिया गया है कि यदि कोई व्यक्ति सच्चे मन से माता लक्ष्मी की पूजा करता है, तो उसे अपने सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

4.      माता लक्ष्मी का निवास:

o    गाने में यह भी कहा गया है कि माता लक्ष्मी पाताल में निवास करती हैं, जो उनके असीम प्रभाव और शक्ति को व्यक्त करता है। वे शुभ कर्मों की प्रेरणा देने वाली और सभी पापों को नष्ट करने वाली हैं।

o    उनका करम-प्रभाव और प्रकाश हर जगह फैलता है, जिससे सभी जीवन में सकारात्मकता और भलाई आती है।

5.      माता लक्ष्मी की कृपा का महत्व:

o    "जिस घर में तुम रहती हो, वहां सभी सद्गुण आते हैं," यह पंक्ति यह दर्शाती है कि जहाँ माता लक्ष्मी की कृपा होती है, वहाँ धन, सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।

o    "जो तुमको ध्यान करता है, वह रिद्धि और सिद्धि प्राप्त करता है," यह भी एक संकेत है कि माता लक्ष्मी की उपासना से न केवल भौतिक सुख मिलते हैं, बल्कि आत्मिक उन्नति भी होती है।

6.      माता लक्ष्मी का प्रभाव:

o    "तुम बिन यज्ञ ना होवे, वस्त्र न कोई पता," यह पंक्ति यह बताती है कि माता लक्ष्मी के बिना कोई यज्ञ या धार्मिक अनुष्ठान पूरा नहीं हो सकता। उनका आशीर्वाद ही यज्ञों को पूर्णता और सफलता प्रदान करता है।

o    गाने में यह भी उल्लेख किया गया है कि वस्त्र, खान-पान, और वैभव सब कुछ माता लक्ष्मी से प्राप्त होता है।

7.      महालक्ष्मी की आरती का फल:

o    गाने का अंतिम हिस्सा महालक्ष्मी की आरती का महत्व बताता है। इस गीत का पाठ करने से न केवल धन और समृद्धि मिलती है, बल्कि पापों का नाश भी होता है।

o    जो कोई माता लक्ष्मी की पूजा और आरती करता है, उसे आनंद और शांति की प्राप्ति होती है, और उसका जीवन संपूर्ण हो जाता है।

यह गीत माता लक्ष्मी की महिमा, उनकी शक्ति, और उनके द्वारा दिए गए आशीर्वाद का विशेष रूप से गुणगान करता है। इस गीत में यह बताया गया है कि जो व्यक्ति सच्चे दिल से माता लक्ष्मी की उपासना करता है, वह हर दृष्टि से समृद्ध और सुखी होता है। माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनका ध्यान और पूजा अत्यंत महत्वपूर्ण है।

यह भक्ति गीत न केवल धन और संपत्ति की देवी लक्ष्मी की आराधना करता है, बल्कि जीवन में समृद्धि, सुख और शांति की प्राप्ति के लिए एक मार्गदर्शन भी प्रदान करता है। 

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता,

तुमको निशदिन सेवत, हर विष्णु विधाता।

ॐ जय लक्ष्मी माता

उमा राम भरमाणी, तुम ही जग माता,

सूर्य चन्द्रमा ध्यावत नारद ऋषि गता।

ॐ जय लक्ष्मी माता

दुर्गा रूप निरंजनी, सुख संपति दाता,

जो कोई तुम को ध्याता, रिद्धि सिद्धि पात।

ॐ जय लक्ष्मी माता

तुम पाताल निवासिनी, तुम ही शुभ दाता,

करम-प्रभाव-प्रकाशिनी, भाव निधि की त्राता।

ॐ जय लक्ष्मी माता

जिस घर में तुम रहती, सब सद्गुण आता,

सब संभव हो जाता, मन नहीं घबराता।

ॐ जय लक्ष्मी माता

तुम बिन यज्ञ ना होवे, वस्त्र नो कोई पता,

खान-पान का वैभव, सब तुमसे पता।

ॐ जय लक्ष्मी माता

शुभगुण मंदिर सुंदर, शीरोदधि जटा,

रतन चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पता।

ॐ जय लक्ष्मी माता

महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गता,

उर्र आनंद समता, पाप उतर जाता।

ॐ जय लक्ष्मी माता

स्थिर चार जगत बचाए शुभ करम नर लता,

राम प्रताप मैया की शुभ दृष्टि चाहता।

ॐ जय लक्ष्मी माता

सोमवार, 6 जनवरी 2025

बजरंग बाण

बजरंग बाण

गाना "जय हनुमान जयति बल-सागर" हनुमान जी की महिमा और उनके अद्भुत बल, शक्ति, और भक्ति का वर्णन करने वाला एक अत्यंत प्रसिद्ध भक्ति गीत है। यह गीत खासतौर पर हनुमान चालीसा और बजरंग बाण के प्रभाव का विस्तार करता है, और हनुमान जी की अनंत शक्तियों और उनकी उपासना से मिलने वाले लाभों का जिक्र करता है। इस गीत में भगवान राम के परम भक्त हनुमान जी की भक्ति, उनके अद्वितीय साहस और बल का गौरवगान किया गया है।

1.      प्रारंभिक श्लोक: गीत की शुरुआत में हनुमान जी की भक्ति और उनके प्रति श्रद्धा का संकेत है। यहाँ पर हनुमान जी की शक्ति का उल्लेख किया जाता है, और कहा जाता है कि जो भी हनुमान जी से प्रार्थना करता है, उनके कार्यों में सफलता मिलती है और वे अच्छे परिणाम प्राप्त करते हैं।

2.      हनुमान जी के अद्वितीय कार्य: 

गाने में हनुमान जी द्वारा किए गए महान कार्यों का विवरण है, जैसे:

o    सुरसा के मुँह में प्रवेश और लंकिनी को हराना।

o    सीता माता की खोज, लंका को जलाना, और अक्षय कुमार का वध करना।

o    हनुमान जी ने राम के आदेश से बाणों से लंका का सफाया किया, जिससे वे राम के दूत के रूप में ख्याति प्राप्त करते हैं।

o    राम के आदेश पर वे दुष्टों और राक्षसों का संहार करते हैं और राम की महिमा का प्रचार करते हैं।

3.      हनुमान जी की विशेषताएँ:

o    हनुमान जी का चित्रण बल, बुद्धि, और श्रद्धा के रूप में किया जाता है। वे भगवान राम के परम भक्त और समर्थ दूत हैं।

o    गीत में हनुमान जी के शक्तिशाली रूप का वर्णन किया गया है, जिसमें उनकी मुँहबोली शक्ति, त्रिशूल, और वज्र जैसे अस्त्रों का उपयोग दिखाया गया है। उनके शक्तिशाली रूप में न केवल उन्हें राक्षसों को नष्ट करने के रूप में देखा जाता है, बल्कि वे भक्तों के दुःख दूर करने और उन्हें सुरक्षा देने वाले देवता के रूप में भी सम्मानित हैं।

4.      बजरंग बाण की महिमा: गाने में बजरंग बाण के जप का महत्त्व भी बताया गया है। कहा गया है कि जो कोई इस बाण का जाप करता है, वह सभी बुराइयों और परेशानियों से मुक्त हो जाता है। इस बाण की पूजा से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति प्राप्त होती है।

o    बजरंग बाण को एक विशेष मंत्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो किसी भी संकट से निपटने के लिए अचूक है। यह बाण न केवल राक्षसों को नष्ट करता है, बल्कि इसे जाप करने से भूत-प्रेत, पिशाच, और सभी प्रकार के संकट दूर होते हैं।

5.      हनुमान जी की पूजा का लाभ: गाने में यह भी कहा गया है कि जो भक्त हनुमान जी की पूजा और जप करता है, वह बिना किसी भय के जीवन जी सकता है। उनके ध्यान से व्यक्ति का जीवन सुखमय और सफल हो जाता है। हनुमान जी के प्रति अडिग विश्वास और भक्ति से सभी प्रकार की बाधाएँ दूर होती हैं और मनचाही सफलता मिलती है।

6.      शिव-पार्वती और हनुमान जी का संबंध: गाने में हनुमान जी के साथ भगवान शिव और माता पार्वती का भी संबंध व्यक्त किया गया है। हनुमान जी को भगवान शिव का अवतार माना जाता है, और उनकी उपासना से भक्तों को शिव की कृपा भी प्राप्त होती है।

यह गाना हनुमान जी की शक्ति, साहस, भक्ति, और उनके अद्भुत कार्यों का गौरवगान करता है। बजरंग बाण का जप करने से प्राप्त होने वाली सुरक्षा और भक्ति की महिमा को भी बताया गया है। यह गीत भक्तों को प्रोत्साहित करता है कि वे हनुमान जी की उपासना करें, ताकि वे जीवन के सभी कष्टों से मुक्त हो सकें और भगवान राम की तरह अपने जीवन में विजय प्राप्त कर सकें। हनुमान जी का नाम लेकर सभी प्रकार की बाधाएँ दूर होती हैं और भक्तों को जीवन में सुख, समृद्धि, और शांति प्राप्त होती है।

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान

जय हनुमंत संत हितकार, सुन लीजै प्रभु अरज हमारी
जन के काज बिलंब न कीजै, आतुर दौरि महा सुख दीजै

जैसे कूदि सिंधु महिपारा, सुरसा बदन पैठि बिस्तारा
आगे जाय लंकिनी रोका, मारेहु लात गई सुरलोका
जाय बिभीषन को सुख दीन्हा, सीता निरखि परमपद लीन्हा
बाग उजारि सिंधु महँ बोरा, अति आतुर जमकातर तोरा

अक्षय कुमार मारि संहारा, लूम लपेटि लंक को जारा
लाह समान लंक जरि गई, जय-जय धुनि सुरपुर नभ भई
अब बिलंब केहि कारन स्वामी, कृपा करहु उर अंतरयामी
जय-जय लखन प्रान के दाता, आतुर ह्वै दुख करहु निपाता

जय हनुमान जयति बल-सागर, सुर-समूह-समरथ भट-नागर
ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले, बैरिहि मारु बज्र की कीले
ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा, ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा
जय अंजनि कुमार बलवंता, शंकरसुवन बीर हनुमंता

बदन कराल काल-कुल-घालक, राम सहाय सदा प्रतिपालक
भूत, प्रेत, पिसाच निसाच, र अगिन बेताल काल मारी मर
इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की, राखु नाथ मरजाद नाम की
सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै, राम दूत धरु मारु धाइ कै

जय-जय-जय हनुमंत अगाधा, दुख पावत जन केहि अपराधा
पूजा जप तप नेम अचारा, नहिं जानत कछु दास तुम्हारा
बन उपबन मग गिरि गृह माहीं, तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं
जनकसुता हरि दास कहावौ, ताकी सपथ बिलंब न लावौ

जै जै जै धुनि होत अकासा, सुमिरत होय दुसह दुख नासा
चरन पकरि, कर जोरि मनावौं, यहि औसर अब केहि गोहरावौं
उठु, उठु, चलु, तोहि राम दुहाई, पायँ परौं, कर जोरि मनाई
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता, ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता

ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल, ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल
अपने जन को तुरत उबारौ, सुमिरत होय आनंद हमारौ
यह बजरंग-बाण जेहि मारै, ताहि कहौ फिरि कवन उबारै
पाठ करै बजरंग-बाण की, हनुमत रक्षा करै प्रान की

यह बजरंग बाण जो जापैं, तासों भूत-प्रेत सब कापैं
धूप देय जो जपै हमेसा, ताके तन नहिं रहै कलेसा
...ताके तन नहिं रहै कलेसा

उर प्रतीति दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान
बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान

रविवार, 5 जनवरी 2025

जय शिव ओमकारा, ओम जय शिव ओमकारा

जय शिव ओमकारा, ओम जय शिव ओमकारा

गाना "जय शिव ओमकारा" भगवान शिव की महिमा और उनके दिव्य रूप का गुणगान करने वाला एक अत्यंत प्रसिद्ध भक्ति गीत है। इस गीत में भगवान शिव के अनेक रूपों और उनके विविध गुणों का वर्णन किया गया है, साथ ही उनके असीम आशीर्वाद और महिमा का बखान भी किया गया है।

गीत की शुरुआत "जय शिव ओमकारा" के उच्चारण से होती है, जो भगवान शिव के अस्तित्व और शक्ति का प्रतीक है। ओमकार शब्द शिव के ब्रह्म स्वरूप का प्रतिनिधित्व करता है, क्योंकि 'ॐ' को सर्वशक्तिमान और सर्वव्यापी ब्रह्म के रूप में माना जाता है।

गीत में भगवान शिव के विभिन्न रूपों का विवरण दिया गया है:

  • पहले श्लोक में शिव को ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव के रूप में चित्रित किया गया है। यहां भगवान शिव के साथ अर्धांगिनी के रूप में माता पार्वती की भी महिमा की गई है।
  • दूसरे श्लोक में शिव के वाहन नंदी, उनके दिव्य आभूषण, और उनके रूपों का विस्तार से वर्णन किया गया है। उनके शरीर पर विभिन्न आभूषण, माला और तंत्र-मंत्र से जुड़ी वस्तुएं हैं।
  • तीसरे श्लोक में भगवान शिव के त्रिगुण रूप (सत्व, रजस, तमस) और उनके त्रिभुवन में प्रभाव का विस्तार से उल्लेख है।
  • चौथे श्लोक में भगवान शिव की उपासना में आने वाली सामग्री जैसे भांग, धतूरा, और उनके निवास स्थान कैलास पर्वत की बात की गई है।
  • पांचवे श्लोक में काशी में स्थित भगवान विश्वनाथ के दर्शन का वर्णन किया गया है। शिव के दर्शन से भक्तों को अपार सुख और संपत्ति की प्राप्ति होती है।

गाने में एक महत्त्वपूर्ण बात यह है कि इसमें शिव के प्रतीक स्वरूप, उनके वाहन (नंदी), उनके शरीर के विशेष चिन्ह जैसे जटा में गंगा का बहना, शेष नाग का लिपटना और उनके भूत-प्रेतों के साथ जुड़ा रूप सब कुछ बताया गया है। साथ ही, उनके साथ लक्ष्मी, सावित्री, और पार्वती की उपस्थिति को भी दर्शाया गया है, जो शिव के साथ साझेदारी करती हैं और उनकी शक्ति को बढ़ाती हैं।

गीत के अंत में, एक सुंदर संदेश है कि जो भी भक्त इस गीत की आरती श्रद्धा भाव से गाता है, वह भगवान शिव के आशीर्वाद से सुख-सम्पत्ति और शांति प्राप्त करता है। शिव की उपासना से जीवन में खुशियाँ और मुक्ति मिलती है, और भक्तों का हर कष्ट दूर हो जाता है।

कुल मिलाकर, यह गाना भगवान शिव की महिमा, उनके अनंत रूप और उनके प्रति असीम भक्ति को दर्शाता है। यह गीत भक्तों को भगवान शिव के प्रति श्रद्धा, प्रेम, और समर्पण की भावना उत्पन्न करता है।


जय शिव ओमकारा, ओम जय शिव ओमकारा,

ब्रम्हा, विष्णु, सदाशिव, अर्धांगि धारा।

ॐ जय शिव ओमकारा

एकानां चतुरानां पंचानं राजे,

हंसानां गरुड़ासन वृषभाहन् साजे।

ॐ जय शिव ओमकारा

दो भुज चार चतुर्भुज दशमुख अति सोहे,

त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।

ॐ जय शिव ओमकारा

अक्षमाला वनमाला मुंडमाला धारी,

त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।

ॐ जय शिव ओमकारा

श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे,

सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे।

ॐ जय शिव ओमकारा

कर के मध्य कमंडलु चरका त्रिशुलाधारी,

सुखाकारी दुखाहारी जगपालन कारी।

ॐ जय शिव ओमकारा

ब्रम्हा विष्णु सदाशिव जानत अविवेक,

प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनो एका।

ॐ जय शिव ओमकारा

लक्ष्मी वा सावित्री पार्वती संगा,

पार्वती अर्धांगी, शिवलहरी गंगा।

ॐ जय शिव ओमकारा

पर्वत सोहे पार्वती, शंकर कैलास,

भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।

ॐ जय शिव ओमकारा

जटा में गैंग बहत है, गल मुंडन माला,

शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगचला।

ॐ जय शिव ओमकारा

काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रम्हचारी,

नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।

ॐ जय शिव ओमकारा

त्रिगुणस्वामीजी की आरती जो कोई नर दे,

कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे।

ॐ जय शिव ओमकारा 

शनिवार, 4 जनवरी 2025

चल काँवरिया, चल काँवरिया, चल काँवरिया, चल काँवर उठा

चल काँवरिया, चल काँवरिया, चल काँवरिया, चल काँवर उठा

यह गाना "चल काँवरिया, चल काँवरिया" शिव भक्तों के बीच एक प्रसिद्ध भक्ति गीत है जो विशेष रूप से कांवड़ यात्रा के दौरान गाया जाता है। यह गीत बाबा भोलेनाथ के प्रति श्रद्धा और भक्ति को व्यक्त करता है। गाने में कांवड़ियों का उत्साह और उनके निस्वार्थ भाव से शिव जी की पूजा करने का संदेश है।

गीत की शुरुआत में "चल काँवरिया, चल काँवरिया" का नारा है, जो कांवड़ यात्रा में चल रहे भक्तों की ताजगी और भक्ति को दर्शाता है। इस नारे में भक्तों को यह प्रेरणा दी जाती है कि वे अपने कांवड़ को उठाकर शिव के जलाभिषेक के लिए चलें। गीत में शिव जी के नाम का उच्चारण करते हुए यह बताया जाता है कि बाबा भोलेनाथ भक्तों की इच्छा पूरी करते हैं और उन पर अपनी कृपा बरसाते हैं।

गीत में सुलतानगंज से गंगा जल भरने का जिक्र है, जो कांवड़ यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भक्तों का यह विश्वास है कि गंगा जल से शिव की पूजा करने से वे अपनी मुक्ति पा सकते हैं और भगवान शिव की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

"बोल-बम" का मंत्र भी पूरे गीत में एक अहम स्थान पर है, जो भक्तों के मनोबल को और उत्साहित करता है। इसके साथ ही गीत में बैद्यनाथ बाबा की महिमा का भी गुणगान किया गया है, जिनकी कृपा से ही यह जगत चल रहा है।

गाने के अंत में एक सकारात्मक संदेश दिया जाता है, जिसमें कहा गया है कि शिव-शंभु के लिए जो भी कांवड़ लेकर आता है, भगवान उन्हें आशीर्वाद देते हैं और उनके जीवन में खुशियाँ और समृद्धि लाते हैं।

कुल मिलाकर, यह गाना कांवड़ यात्रा के महत्व को रेखांकित करता है और भक्तों को विश्वास और भक्ति के साथ शिव की पूजा करने के लिए प्रेरित करता है। यह गीत श्रद्धा, उत्साह, और एकता का प्रतीक है, जो कांवड़ यात्रा के दौरान पूरे देश में गाया जाता है।

जय भोले बाबा

चल काँवरिया, चल काँवरिया, चल काँवरिया, चल काँवर उठा
(चल काँवरिया, चल काँवरिया, चल काँवरिया, चल काँवर उठा)
काँवर उठा, नारा शिव का लगा, मन चाहा फल देंगे बाबा

चल काँवरिया, चल काँवरिया, चल काँवरिया, चल काँवर उठा
(चल काँवरिया, चल काँवरिया, चल काँवरिया, चल काँवर उठा)
काँवर उठा, नारा शिव का लगा, मन चाहा फल देंगे बाबा

ॐ हरि ॐ, ॐ हरि ॐ

सुलतानगंज में गंगा जल भर ले (ॐ हरि ॐ)
सुलतानगंज में गंगा जल भर ले
काँवर उठा के नंगे पांव चल दे
काँवर उठा के नंगे पांव चल दे
बोलो बोल-बम-बम तू भज ले शिवम्
अब वरदानी बाबा करेंगे सब पूरा

नदी हो, पहाड़ हो पांव ना रुके (ॐ हरि ॐ)
नदी हो, पहाड़ हो पांव ना रुके
नारा बोल-बम, बोल-बम का लगे
नारा बोल-बम, बोल-बम का लगे
तू शिव का कहार, वही बेड़ा पार
तू चल से शिव जी को कँवर चढ़ा

बाबा बैद्यनाथ की है महीमा अपार (ॐ हरि ॐ)
बाबा बैद्यनाथ की है महीमा अपार
उन्हीं की दया से चल जग-संसार
उन्हीं की दया से चल जग-संसार
शिव-शंभु के लिए जो भी काँवर ला दे
दीप खुशियों के भोलेनाथ देते हैं जगा

चल काँवरिया, चल काँवरिया, चल काँवरिया, चल काँवर उठा
काँवर उठा, नारा शिव का लगा, मन चाहा फल देंगे बाबा
(चल काँवरिया, चल काँवरिया, चल काँवरिया, चल काँवर उठा)
काँवर उठा, नारा शिव का लगा, मन चाहा फल देंगे बाबा

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